थारी आरती उतारू गणराज मैं बरी जाऊ चारणोंमे
रणका भवर से देवा आप पधारो
मेरे कारज देवा आप सभ्भरो 2
मेरी विनती करो स्वीकार मैं बरी जाऊ चारणोंमे
कानो में कुण्डल शोभे गले मुतियन माला
रूनझुड देवा थारी पैजन बजे 2
मेरी विनती करो स्वीकार मैं बरी जाऊ चारणोंमे
शिव संकर के देवा प्राणो से प्यारो
माँ गौरा के देवा परम दुलारो
मारो पूर्ण करियो कमा मैं बरी जाऊ चारणोंमे
आरती करत भगत दिन राति
प्रेम का दीपक देवा भाव की बाती
मेरी आरती करो स्वीकार मैं बरी जाऊ चारणोंमे