श्री हनुमान स्तुति

मंगल मूरति मारुत नंदन
सकल अमंगल मूल निकंदन

पवनतनय संतन हितकारी
ह्रदय बिराजत अवध बिहारी

मातु-पिता गुरु गणपति सारद
शिवा-समेत शम्भु, शुक्र नारद

चरन कमल बिन्धौ सब काहु
देहु रामपद नेहु निबाहु

बंधन राम लखन वैदेही
यह तुलसी के परम सनेही

~ सियावर रामचंद्रजी की जय ~

जाके गति है हनुमान की
ताकी पैज पुजि आई, यह रेखा कुलिस पषान की ।।

अघटित-घटन, सुघट-बिघटन, ऐसी बिरूदावलि नहिं आनकी
सुमिरत संकट-सोच-बिमोचन, मूरति मोद-निधानकी ।।

तापर सानुकूल गिरिजा, हर, लषन, राम अरू जानकी

तुलसी कपि की कृपा-विलोकनि, खानि सकल कल्यानकी ।।|